21वीं सदी की शिक्षा में घुलेगा भारतीय दर्शन का ज्ञान, डीपीएस बोकारो में ‘सांख्य सिद्धांत’ पर कार्यशाला . . . .

21वीं सदी की शिक्षा में घुलेगा भारतीय दर्शन का ज्ञान, डीपीएस बोकारो में ‘सांख्य सिद्धांत’ पर कार्यशाला

  • शिक्षकों ने सीखे ज्ञानार्जन के छह मजबूत स्तंभ, थिंकिंग क्लासरूम विकसित करने पर दिया जोर
  • भारतीय दर्शन शास्त्र ऋषियों और मुनियों द्वारा दिया गया ज्ञान का वह अनमोल खजाना है, जो आज की आधुनिक शिक्षा को एक नई दिशा दे सकता है. इसी विचार के साथ दिल्ली पब्लिक स्कूल (डीपीएस) बोकारो के महात्मा गांधी सम्मेलन कक्ष में थ्योरी ऑफ नॉलेज पर एक विशेष क्षमता संवर्धन कार्यक्रम का आयोजन किया गया.

सीबीएसई सीओई, पटना के तत्वावधान में आयोजित कार्यशाला का उद्देश्य शिक्षकों को भारतीय दर्शन के सांख्य सिद्धांत व प्रमाणों से परिचित करा शिक्षण पद्धति को और अधिक प्रभावी बनाना था. शिक्षकों ने प्राचीन भारतीय ज्ञान परंपरा को आधुनिक क्लासरूम से जोड़ने के गुर सीखे, जिसका सीधा लाभ छात्रों को मिल सके.

शुरुआत बतौर साधनसेवी (रिसोर्स पर्सन) डीपीएस चास की निदेशक सह प्राचार्य डॉ. मनीषा तिवारी ने ध्यान और आत्म-मूल्यांकन गतिविधि के साथ की. कहा : हम स्वयं के लिए सबसे महत्वपूर्ण व्यक्ति हैं, इसलिए अपनी व्यक्तिगत भलाई को प्राथमिकता देना आवश्यक है.

ज्ञान अर्जन के मुख्य खंड पर चर्चा करते हुए डॉ. तिवारी ने भारतीय दर्शन शास्त्र के छह प्रमाणों- प्रत्यक्ष, अनुमान, उपमान, शब्द, अर्थापत्ति और अनुपलब्धि पर विस्तार से प्रकाश डाला. उन्होंने जोर देकर कहा : हजारों वर्ष पहले रखे गए ये छह स्तंभ आज की समकालीन शिक्षा और नई राष्ट्रीय शिक्षा नीति के लिए बेहद प्रासंगिक हैं.

उन्होंने विद्यार्थियों में क्रिटिकल थिंकिंग विकसित किए जाने पर भी बल दिया. कार्यशाला के द्वितीय साधनसेवी त्रिमूर्ति पब्लिक स्कूल के उप-प्राचार्य अनिल कुमार मोदी ने इन सिद्धांतों की 21वीं सदी के शैक्षिक परिदृश्य में उपयोगिता पर गहन चर्चा की. शिक्षकों को बताया : कैसे इन माध्यमों से छात्र वास्तविक ज्ञान प्राप्त कर सकते हैं.

सीबीएसई के सिटी कोऑर्डिनेटर व डीपीएस बोकारो विद्यालय के प्राचार्य डॉ. एएस गंगवार ने थिंकिंग क्लासरूम (सोचने वाली कक्षाएं) विकसित करने की आवश्यकता पर बल दिया. उन्होंने कहा : भारतीय दर्शन शास्त्र के सिद्धांत व अवधारणाएं एनईपी 2020 के साथ मिलकर आधुनिक शिक्षण और सीखने की पहल को नया आयाम दे सकते हैं.

हमें विद्यार्थियों में ऐसी व्यक्तिगत दृष्टि विकसित करनी होगी, जहां वे सवाल पूछ सकें कि हम जो जानते हैं, वह कैसे जानते हैं? कार्यशाला के दौरान विषयवस्तु से संबंधित विभिन्न प्रकार की गतिविधियां हुई. समापन मूल्यांकन सत्र से हुआ.

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