आज बच्चों का विकास और खुशी इस बात पर निर्भर है कि अभिभावक उन्हें विश्वास, समय व सही मार्गदर्शन दें, न कि केवल भौतिक सुख-सुविधाएं : डॉ. मनीषा तिवारी . . . .

  • बच्चों का सर्वांगीण विकास केवल शिक्षा से नहीं, बल्कि परिवार के वातावरण और अभिभावकों के व्यवहार व विश्वास से होता है
  • डीपीएस-चास की निदेशिका/प्राचार्या डॉ. मनीषा तिवारी से “आज के अभिभावक और बच्चे के बीच का संबंध” विषय पर “बात सप्ताह की”
  • आज के दौर में अभिभावक और बच्चों के रिश्ते में तकनीक, प्रतिस्पर्धा और व्यास्तता प्रमुख कारक हैं. माता-पिता बच्चों के उज्ज्वल भविष्य के लिए उन पर भरोसा कर रहे हैं. उन्हें निर्णय लेने की स्वतंत्रता (Egalitarian) दे रहे हैं. हालाँकि, काम में अत्यधिक व्यस्तता व तकनीक के प्रभाव से बच्चों से संवाद में कमी और वैचारिक दूरी भी बढ़ रही है, जिससे भावनात्मक जुड़ाव बनाए रखने की चुनौती है. ये बातें डीपीएस-चास की निदेशिका/प्राचार्या डॉ. मनीषा तिवारी ने “बात सप्ताह की” में कही. डॉ. मनीषा तिवारी “आज के अभिभावक और बच्चे के बीच का संबंध” विषय पर विचार प्रकट कर रही थी.

बच्चों पर भरोसा करना और उन्हें सही मार्गदर्शन देना ही उन्हें जिम्मेदार बनाता है

डॉ. मनीषा तिवारी ने कहा : पुराने समय की तरह अब बच्चे सिर्फ ‘सुने’ नहीं जाते, बल्कि उन्हें स्वतंत्र निर्णय लेने और अपनी बात रखने की छूट है, जिससे रिश्ता अधिक दोस्ताना (Egalitarian) हो गया है. डिजिटल लाइफस्टाइल के कारण परिवार के भीतर आमने-सामने की बातचीत (Face-to-face interaction) कम हो गई है, जिससे संवाद की कमी (Disconnection) प्रमुख समस्या बन रही है. कई अभिभावक बच्चों पर हर समय नजर रखते हैं, जो बच्चों में डर या असुरक्षा पैदा कर सकता है. बच्चों पर भरोसा करना व उन्हें सही मार्गदर्शन देना ही उन्हें जिम्मेदार बनाता है.

हर दिन बच्चों के साथ समय बिताना और उनके मन की बात समझना आवश्यक है

डॉ. मनीषा तिवारी ने कहा : प्रतिस्पर्धी माहौल में अभिभावक बच्चों के उज्ज्वल भविष्य (जैसे-डॉक्टर, इंजीनियर) के लिए उन पर ध्यान केंद्रित कर रहे हैं, जो कभी-कभी मानसिक तनाव का कारण बनता है. बच्चों का सर्वांगीण विकास केवल शिक्षा से नहीं, बल्कि परिवार के वातावरण और अभिभावकों के व्यवहार व विश्वास से होता है. हर दिन बच्चों के साथ समय बिताना और उनके मन की बात समझना आवश्यक है. आज बच्चों का विकास और खुशी इस बात पर निर्भर करती है कि अभिभावक उन्हें विश्वास, समय और सही मार्गदर्शन (Mentorship) दें, न कि केवल भौतिक सुख-सुविधाएं.

अभिभावक अपने बच्चों के प्रति अपनी जिम्मेदारी का ईमानदारी के साथ निर्वाह करें

डॉ. मनीषा तिवारी ने कहा : अब समय आ गया है कि अभिभावक अपने बच्चों के प्रति अपनी जिम्मेदारी का ईमानदारी के साथ निर्वाह करें. बच्चों का घर पर देखभाल करने से उनको शिक्षा के क्षेत्र में मजबूत किया जा सकता है. वर्तमान समय में अभिभावक अपने कार्यों में इतने व्यस्त हो गए हैं कि उनको बच्चों का कोई ध्यान नहीं है, जिससे बच्चों की शिक्षा के क्षेत्र में नींव कमजोर हो रही है. इसका खामियाजा समय बीतने के साथ अभिभावकों व बच्चों को उठाना पड़ता है. अप्रैल से नए सत्र शुरू हो गया है. अभिभावकों को नए सत्र से पहल करनी चाहिए.

परिवार के हर सदस्यों को कुछ समय बच्चों के साथ बिताकर उनके मन की बात को समझना चाहिए

डॉ. मनीषा तिवारी ने कहा : स्कूल में बच्चा पांच से छह घंटे अध्यापक की देखरेख में होता है, लेकिन उसका पूरा समय अपने परिवार के साथ बीतता है. इसलिए हर माता-पिता को अपने बच्चों को समय देना चाहिए. परिवार के हर सदस्यों को कुछ समय बच्चों के साथ बिताकर उनके मन की बात को समझना चाहिए. अनुशासन, प्रेम व वात्सल्य के साथ दी गई शिक्षा ही विद्यार्थियों को अच्छा नागरिक बना सकती है. अभिभावकों को बच्चों को शुरू से ही उनकी जिम्मेदारियों के प्रति प्रेरित करना चाहिए. इसकी शुरूआत घर से की जानी चाहिए. इससे बड़े होने पर वे अपनी जिम्मेदारी समझ सकेंगे.

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