नई मूल्यांकन प्रणाली क्रांतिकारी बदलाव, यह केवल इस बात पर ध्यान नहीं देता कि छात्र ने कितना “याद” किया है, बल्कि इसपर ध्यान केंद्रित करता है कि छात्र ने कितना “सीखा” है : प्राचार्य सूरज शर्मा . . . .

नई मूल्यांकन प्रणाली क्रांतिकारी बदलाव, यह केवल इस बात पर ध्यान नहीं देता कि छात्र ने कितना “याद” किया है, बल्कि इसपर ध्यान केंद्रित करता है कि छात्र ने कितना “सीखा” है : प्राचार्य सूरज शर्मा

  • चिन्मय विद्यालय बोकारो में दो दिवसीय “दक्षता आधारित मूल्यांकन व मानसिक स्वास्थ्य” कार्यशाला शुरू
  • उद्देश्य आधुनिक शिक्षा पद्धति के अनुरूप शिक्षकों के कौशल को और अधिक प्रभावी बनाना
  • शिक्षा का उद्देश्य छात्र को जीवन की चुनौतियों के लिए सक्षम बनाना, केवल परीक्षा के लिए तैयार करना नहीं : उप प्राचार्य डॉ. रोशन शर्मा
  • शैक्षणिक उत्कृष्टता प्राप्त करने की दौड़ में छात्रों और शिक्षकों, दोनों का मानसिक स्वास्थ्य सर्वोपरि होना चाहिए : काउंसलर मनीष कुमार
  • चिन्मय विद्यालय बोकारो में बुधवार को सभी शिक्षकों और कर्मचारियों के लिए दो दिवसीय ‘इन-हाउस’ प्रशिक्षण कार्यक्रम की शुरुआत हुई. मुख्य विषय ‘दक्षता आधारित मूल्यांकन’ था. उद्देश्य आधुनिक शिक्षा पद्धति के अनुरूप शिक्षकों के कौशल को और अधिक प्रभावी बनाना था.

कार्यशाला के मुख्य वक्ता के रूप में स्कूल के उप प्राचार्य डॉ. रोशन शर्मा व मानसिक स्वास्थ्य परामर्शदाता मनीष कुमार उपस्थित रहे. मुख्य रूप से विद्यालय के प्राचार्य सूरज शर्मा व वरीय उप प्राचार्य नरमेंद्र कुमार उपस्थित रहे. कार्यशाला में स्कूल के शिक्षक-कर्मी शामिल हुए.

प्राचार्य सूरज शर्मा ने कहा : मौजूदा समय में शारीरिक स्वास्थ्य से भी अधिक महत्वपूर्ण मानसिक स्वास्थ्य का ध्यान रखना जरूरी है. मानसिक रूप से मजबूत व शांत शिक्षक विद्यार्थियों को बेहतर कल के लिए तैयार कर सकते हैं. यह गुणवत्तापूर्ण शिक्षा के लिए जरूरी है.

सूरज शर्मा ने दक्षता आधारित मूल्यांकन पर कहा : पारंपरिक परीक्षा प्रणाली से हटकर नई मूल्यांकन प्रणाली क्रांतिकारी बदलाव है. यह केवल इस बात पर ध्यान नहीं देता कि छात्र ने कितना “याद” किया है, बल्कि इसपर ध्यान केंद्रित करता है कि छात्र ने कितना “सीखा” है.

डॉ. रोशन शर्मा ने ‘दक्षता आधारित मूल्यांकन’ की बारीकियों पर प्रकाश डाला. उन्होंने इस बात पर बल दिया कि वर्तमान समय में मूल्यांकन केवल रटने की क्षमता पर आधारित न होकर छात्र के वास्तविक कौशल और ज्ञान के व्यावहारिक अनुप्रयोग पर केंद्रित होना चाहिए.

डॉ. शर्मा ने कहा : शिक्षा का वास्तविक उद्देश्य छात्र को केवल परीक्षा के लिए तैयार करना नहीं, बल्कि उसे जीवन की चुनौतियों के लिए सक्षम बनाना है. दक्षता आधारित मूल्यांकन शिक्षकों को यह समझने में मदद करता है कि छात्र ने किसी अवधारणा को कितना गहराई से समझा है.

विद्यालय के काउंसलर मनीष कुमार ने शिक्षकों के सामाजिक और मानसिक स्वास्थ्य पर चर्चा की. उन्होंने पीपीटी की मदद से सभी को विषय की बारीकियों के बारे में समझाया. कहा : स्वस्थ व संतुलित मानसिक स्थिति ही शिक्षक को छात्रों के साथ जुड़ने में मदद करती है.

काउंसलर मनीष ने तनाव प्रबंधन, कार्य-जीवन संतुलन व कक्षा में सकारात्मक वातावरण बनाने के तरीकों पर चर्चा की. श्री कुमार ने इस बात पर जोर दिया कि शैक्षणिक उत्कृष्टता प्राप्त करने की दौड़ में छात्रों और शिक्षकों, दोनों का मानसिक स्वास्थ्य सर्वोपरि होना चाहिए.

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