पार्क में चोरी, चंदनकियारी पुलिस की गश्त पर सवालिया निशान, वनपाल ने दर्ज कराई प्राथमिकी . . . .

चंदनकियारी में बेखौफ बदमाशों का तांडव जारी है। पुलिस की सुस्ती का फायदा उठाकर अपराधी एक के बाद एक चोरी की वारदातों को अंजाम दे रहे हैं। ताजा मामला चंदनकियारी स्थित स्वामी विवेकानंद अटल स्मृति पार्क का है, जहां सोमवार की रात अज्ञात बदमाशों ने पार्क के गार्ड रूम और जेनरेटर रूम का ताला तोड़कर हजारों के सामान पर हाथ साफ कर दिया।

हैरानी की बात यह है कि पिछले एक सप्ताह के भीतर चंदनकियारी थाना क्षेत्र में चोरी की यह दूसरी बड़ी घटना है, जिससे स्थानीय लोगों में डर और प्रशासन के खिलाफ आक्रोश का माहौल है।

चंदनकियारी में बेखौफ घूम रहे ये अपराधी अब सरकारी संपत्तियों को भी निशाना बनाने लगे हैं। सोमवार की रात अपराधियों ने स्वामी विवेकानंद अटल स्मृति पार्क को अपना शिकार बनाया। पार्क के कर्मचारियों के मुताबिक, रात 10 बजे जब नाइट गार्ड कृतिवास महतो अपनी ड्यूटी पर पहुंचे, तो उन्होंने देखा कि गार्ड रूम और जेनरेटर रूम दोनों के ताले टूटे पड़े थे।

बदमाशों ने जेनरेटर रूम में रखी कीमती बैटरियां उड़ा लीं और जेनरेटर के नट-बोल्ट भी खोल डाले। आशंका जताई जा रही है कि चोर पूरा जेनरेटर ही चुराने की फिराक में थे, लेकिन किसी वजह से सिर्फ बैटरियां और पुर्जे ही ले जा सके।

प्रभारी वनपाल धीरज कुमार ने बताया कि सोमवार की रात गार्ड के आने पर घटना का पता चला। जेनरेटर रूम से बैटरियां और कई बोल्ट गायब हैं। हमने चंदनकियारी थाना में अज्ञात बदमाशों के खिलाफ लिखित शिकायत दर्ज करा दी है।

स्थानीय लोगों में पुलिस की कार्यशैली को लेकर भारी नाराजगी है। अभी महज एक सप्ताह पहले ही चंदनकियारी में सीमेंट एजेंसी ‘सुलोचना एंटरप्राइजेज’ से लाखों रुपये की नकदी चोरी हुई थी। उस मामले में भी पुलिस अब तक खाली हाथ है और आरोपी पकड़ से बाहर हैं।

पार्क कर्मियों और स्थानीय निवासियों का आरोप है कि पार्क के आसपास देर रात तक असामाजिक तत्वों और नशेड़ियों का जमावड़ा लगा रहता है, लेकिन शिकायत के बावजूद पुलिस कभी गश्त या कार्रवाई नहीं करती। इसी पुलिसिया लापरवाही का नतीजा है कि अपराधी बेखौफ होकर वारदातों को अंजाम दे रहे हैं।

वन विभाग के प्रभारी वनपाल धीरज कुमार की शिकायत पर पुलिस ने मामला दर्ज कर जांच शुरू कर दी है। लेकिन बड़ा सवाल यह है कि एक के बाद एक हो रही इन चोरियों पर चंदनकियारी पुलिस कब लगाम लगा पाएगी? क्या अपराधियों को कानून का कोई खौफ नहीं रह गया है?

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