शिकायत लेकर कार्यालय आने वाले लोगों को पावती रशिद दें, उन्हें अच्छे से बैठाएं – पानी पिलाएं, गूड गवर्नेंस के सिद्धांतों का अनुपालन करेंः आईजी . . . .

कई बार कार्य व्यस्तता के कारण कॉल पिक नहीं हो पाता, लेकिन हमें कॉल बैक करने की आदत बनानी चाहिए

प्रजा के सुख में ही राजा का सुख निहित है, किसी भी परिस्थिति में गर्वनेंस गूड होना चाहिए – अगर गर्वनेंस गूड नहीं होगा तो वह बैड गर्वनेंस हो जाएगाः डीसी

गूड गर्वनेंस में जनता का भरोसा – जिम्मेदारी – पारदर्शिता जरूरी है, आम जनों को सुरक्षा – शिक्षा व स्वास्थ्य का अधिकार – हम सब मिलकर एक टीम के तरह करें काम

अपनी जिम्मेदारी को समझ कर अपने दायरे के अंदर काम करें – वहीं से गूड गर्वनेंस शुरू हो जाएगाः एसपी

समाज के हर व्यक्ति के लिए प्रशासन खड़ा है, गूड गर्वनेंस शब्द की उत्तपति की दी जानकारी

प्रशासन का हर दिन का काम ही गूड गर्वनेंस है, गूड गर्वनेंस में लोगों का भरोसा – पारदर्शिता – कार्रवाई महत्वपूर्ण कड़ीः डीडीसी

ग्रामीण विकास विभाग, आपूर्ति विभाग, शिक्षा विभाग, समाज कल्याण, कल्याण, सामाजिक सुरक्षा, पुलिस आदि विभागों ने गूड गर्वनेंस के तहत किए जाने वाले कार्यों – उपलब्धियों से लोगों को कराया अवगत

समाहरणालय सभागार में गूड गर्वनेंस विक के तहत भव्य कार्यशाला का हुआ आयोजन, पुलिस महानिरीक्षक (आईजी) उत्तरी छोटानागपुर प्रक्षेत्र श्री सुनील भास्कर, उपायुक्त (डीसी) श्री अजय नाथ झा, पुलिस अधीक्षक (एसपी) श्री हरविंदर सिंह, उप विकास आयुक्त (डीडीसी) श्रीमती शताब्दी मजूमदार समेत अन्य पदाधिकारी हुए शामिल

गूड गर्वनेंस वीक के अवसर पर मंगलवार को समाहरणालय सभागार में एक भव्य कार्यशाला का आयोजन किया गया। इस कार्यशाला का उद्देश्य प्रशासनिक व्यवस्था को और अधिक जनोन्मुखी, पारदर्शी, जवाबदेह एवं संवेदनशील बनाना रहा। कार्यशाला में पुलिस महानिरीक्षक (आईजी) उत्तरी छोटानागपुर प्रक्षेत्र श्री सुनील भास्कर, उपायुक्त (डीसी) श्री अजय नाथ झा, पुलिस अधीक्षक (एसपी) श्री हरविंदर सिंह, उप विकास आयुक्त (डीडीसी) श्रीमती शताब्दी मजूमदार सहित जिले के विभिन्न विभागों के वरीय पदाधिकारी एवं कर्मी उपस्थित रहे।

लोगों के साथ संवेदनशील व्यवहार ही सुशासन की पहचान : आईजी

कार्यशाला को संबोधित करते हुए पुलिस महानिरीक्षक (आईजी) श्री सुनील भास्कर ने कहा कि कार्यालयों में शिकायत – अनुरोध लेकर आने वाले आम नागरिकों के साथ सम्मानजनक एवं मानवीय व्यवहार किया जाना चाहिए। उन्होंने स्पष्ट निर्देश दिया कि शिकायत लेकर आने वाले प्रत्येक व्यक्ति को पावती रसीद अनिवार्य रूप से दी जाए, उन्हें उचित स्थान पर बैठाया जाए तथा पेयजल जैसी बुनियादी सुविधाएं उपलब्ध कराई जाएं।

आईजी ने कहा कि कई बार कार्य की व्यस्तता के कारण फोन कॉल रिसीव नहीं हो पाती, परंतु प्रशासनिक अधिकारियों और कर्मियों को कॉल बैक करने की आदत विकसित करनी चाहिए, ताकि आम जनता को यह भरोसा हो कि उनकी बात सुनी जा रही है। उन्होंने कहा कि गूड गर्वनेंस केवल नियमों का पालन नहीं, बल्कि व्यवहार में संवेदनशीलता और सेवा भाव का नाम है।

प्रजा के सुख में ही शासक का सुख निहित : डीसी

उपायुक्त (डीसी) श्री अजय नाथ झा ने अपने संबोधन में कहा कि प्रजासुखे सुखं राज्ञः, प्रजानां च हिते हितम् अर्थात प्रजा के सुख में ही राजा का सुख निहित है – यह विचार आज भी प्रशासन के लिए मार्गदर्शक सिद्धांत है। उन्होंने कहा कि किसी भी परिस्थिति में गवर्नेंस गूड होना चाहिए, क्योंकि यदि शासन व्यवस्था अच्छी नहीं होगी तो वह स्वतः बैड गर्वनेंस में बदल जाएगी।
डीसी ने कहा कि सुशासन की नींव जवाबदेही, पारदर्शिता और ईमानदार कार्यप्रणाली पर टिकी होती है। जनता को सुरक्षा, शिक्षा और स्वास्थ्य जैसे मूल अधिकार दिलाना प्रशासन की प्राथमिक जिम्मेदारी है।

डीसी ने कहा कि राष्ट्रपिता महात्मा गांधी ने कहा था कि अंतिम व्यक्ति की पहचान करें और वहां से काम शुरू करें। जैसे ट्रेन कि इंजन अपने अंतिम बोगी को भी साथ लेकर चलती है और जो बच्चा रोता नहीं, मां उसका भी बराबर ख्याल करती है। ठीक उसी प्रकार हम *प्रशासनिक पदाधिकारियों को भी अपनी जिम्मेदारी समझते हुए समाज के अंतिम व्यक्ति तक विकास – सरकार की कल्याणकारी योजनाओं से अच्छादित करना है। हम सबकों मिलकर एक टीम के साथ काम करना है।

अपने दायित्व और दायरे में ईमानदारी से कार्य करें : एसपी

पुलिस अधीक्षक (एसपी) श्री हरविंदर सिंह ने कहा कि प्रत्येक पदाधिकारी और कर्मचारी को अपनी जिम्मेदारी को समझते हुए अपने निर्धारित दायरे में ईमानदारी और निष्ठा से कार्य करना चाहिए। उन्होंने कहा कि वहीं से गूड गर्वनेंस की वास्तविक शुरुआत होती है।
एसपी ने कहा कि प्रशासन तभी प्रभावी बन सकता है जब सभी विभाग एक टीम की तरह समन्वय के साथ कार्य करें और आम जनता की समस्याओं का समयबद्ध समाधान सुनिश्चित करें। उन्होंने गूड गर्वनेंस शब्द की उत्पत्ति, उसके ऐतिहासिक परिप्रेक्ष्य एवं वर्तमान समय में उसकी प्रासंगिकता पर भी प्रकाश डाला और कहा कि प्रशासन समाज के हर वर्ग एवं हर व्यक्ति के लिए खड़ा है।

प्रशासन का हर दिन का कार्य ही सुशासन का उदाहरण : डीडीसी

उप विकास आयुक्त (डीडीसी) श्रीमती शताब्दी मजूमदार ने कहा कि प्रशासन का प्रतिदिन का कार्य ही गूड गर्वनेंस का प्रत्यक्ष उदाहरण होता है। उन्होंने कहा कि सुशासन में जनता का भरोसा सबसे महत्वपूर्ण होता है, जिसे पारदर्शिता, निष्पक्षता और त्वरित कार्रवाई के माध्यम से ही अर्जित किया जा सकता है।
विभिन्न विभागों ने योजनाओं एवं उपलब्धियों की दी जानकारी

कार्यशाला के दौरान ग्रामीण विकास विभाग, आपूर्ति विभाग, शिक्षा विभाग, समाज कल्याण विभाग, सामाजिक सुरक्षा विभाग, कल्याण, पुलिस विभाग सहित अन्य विभागों द्वारा गूड गर्वनेंस के अंतर्गत संचालित योजनाओं, कार्यों एवं उपलब्धियों की विस्तृत जानकारी दी गई।

संबंधित विभागों के अधिकारियों ने बताया कि कैसे योजनाओं का लाभ अंतिम व्यक्ति तक पहुंचाने के लिए तकनीक, पारदर्शिता और निगरानी व्यवस्था को मजबूत किया जा रहा है।

जनता के विश्वास से ही सफल होगा सुशासन

कार्यशाला के समापन पर सभी वक्ताओं ने इस बात पर बल दिया कि जनता का विश्वास प्रशासन की सबसे बड़ी शक्ति है। सुशासन तभी सफल होगा जब प्रशासनिक अधिकारी और कर्मचारी संवेदनशीलता, जवाबदेही और सेवा भाव के साथ कार्य करें। गूड गर्वनेंस वीक के माध्यम से प्रशासन ने यह संदेश दिया कि शासन व्यवस्था जनता के साथ, जनता के लिए और जनता के हित में कार्य करने के लिए प्रतिबद्ध है।

मौके पर एसडीओ बेरमो श्री मुकेश मछुआ, एनडीसी श्री प्रभाष दत्ता, डीएसओ श्रीमती शालिनी खालखो,स्थापना उप समाहर्ता श्री प्रेमचंद सिन्हा,मुख्यालय डीएसपी श्री अनिमेश गुप्ता,डीपीआरओ श्री रवि कुमार,सहायक निदेशक सामाजिक सुरक्षा श्री पियूष, डीएसडब्ल्यूओ डा. सुमन गुप्ता, डीईओ श्री जगरनाथ लोहरा, डीएसई श्री अतुल कुमार चौबे, डीडब्लूओ श्रीमती एन एस कुजूर, डीपीओ श्री राज शर्मा, एपीआरओ अविनाश कुमार सिंह, डीडीएमओ श्री शक्ति कुमार,नोडल पदाधिकारी श्री पंकज दूबे, पीओ मानिकचंद्र प्रजापति आदि उपस्थित थे।

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