
झारखंड हाई कोर्ट ने हेमंत सोरेन सरकार को एक कड़ा निर्देश देते हुए कहा है कि सभी थाने में सीसीटीवी कैमरा लगाया जाए. हाईकोर्ट ने ये भी कहा कि ये कार्यवाही तय समय सीमा के अंदर होनी चाहिए. ताकि थाने के अंदर होने वाली गतिविधि पारदर्शी तरीके से सामने आ सके और किसी भी प्रकार की अवैध गतिविधि पर रोक लग सके.

झारखंड हाई कोर्ट ने मंगलवार को एक प्रॉपर्टी रिएल्टी प्राइवेट लिमिटेड शौभिक बनर्जी सहित अन्य की ओर से दाखिल एक याचिका के दौरान कही गई. पिछली सुनवाई में अदालत ने ने मुख्य सचिव, गृह सचिव, डीजीपी और आईटी विभाग की सचिव को सशरीर कोर्ट में उपस्थित होने का आदेश दिया था. अदालत के निर्देश पर वरिष्ठ अधिकारी उपस्थित हुए और कोर्ट के समक्ष अब तक की प्रगति रिपोर्ट पेश की.

सुनवाई के दौरान अदालत ने कहा कि लास्ट 31 दिसंबर से पुर्व तक सभी जिलों के थाने में सीसीटीवी कैमरे के लिए टेंडर प्रक्रिया पूरी हो जानी चाहिए. इसके बाद राज्य के सभी 334 थानों में जल्दी से कैमरे लगाने का काम शुरु किया जाए.
अदालत ने ये भी स्पष्ट किया है कि सीसीटीवी कैमरे चालू अवस्था में होनी चाहिए और डेटा नियमित रुप से संरक्षित रहनी चाहिए. कोर्ट ने 5 जनवरी तक आदेश के अनुपालन का रिपोर्ट भी मांगी है. बता दें कि ये मामला पश्चिम बंगाल निवासी शौभिक बनर्जी की याचिका पर आधारित है.

याचिकाकर्ता ने बताया कि चेक बाउंस मामले में धनबाद कोर्ट में जमानत के लिए आए थे लेकिन धनबाद पुलिस ने दो दिनों तक थाने में अवैध रुप से रोके रखा और जबरन दबाव बनाकर दूसरे पक्ष का पक्ष लिया. और दावा किया की पूरी घटना बैंक मोड़ थाने में लगे सीसीटीवी कैमरे में कैद हुई थी. लेकिन पुलिस ने अदालत में बताया कि केवल दो दिन का ही सीसीटीवी बैकअप उपलब्ध था.
