
ट्रेड यूनियन संयुक्त मोर्चा, बोकारो द्वारा मेन गेट पास सेक्शन के समक्ष एक मजदूर प्रदर्शन सह सभा का आयोजन आई डी प्रसाद की अध्यक्षता में संपन्न हुई।
सभा को संबोधित करते हुए मुख्य वक्ता बी डी प्रसाद ने कहा कि 1991 में हमारे देश में नई आर्थिक नीति लागू होने के बाद से, मजदूर वर्ग के स्वतंत्र क्षेत्रीय औद्योगिक कार्रवाइयों के अलावा रैलियां, धरने, महापड़ाव और 21 आम हड़तालों जैसे संयुक्त विरोध कार्रवाई के कारण प्रमुख क्षेत्रों में निजीकरण और एफडीआई की प्रक्रिया को धीमा करने के साथ-साथ अधिकारों और आजीविका पर हमलों को भी काफी हद तक रोकने में सफलता मिली।
लेकिन पिछले एक दशक से केन्द्र सरकार “व्यापार करने में आसानी” सुनिश्चित करने के नाम पर, सत्तारूढ़ दलों को कॉर्पोरेट्स द्वारा दी जाने वाली वित्तीय पोषण के प्रतिदान के लिए आतुर हो गई है। इसके अलावा, संकटग्रस्त वित्तीय पूंजी के हुक्म के आगे आत्मसमर्पण करने की होड़ भी और तेज हो गई है।
कोविड संकट के दौरान “आपदा में अवसर” का नारा देकर आम जनता और विशेष रूप से मजदूरों और किसानों पर हमला तेज किया।
इन अभूतपूर्व हमलों ने मजदूरों को कोविड संकट के दौरान भी अपने आंदोलनों को तेज करने के लिए मजबूर किया है। 8 जनवरी 2020, 26 नवंबर 2020 और 28-29 मार्च 2022 को देशव्यापी आम हड़ताल के अलावा जिला और राज्य स्तर पर कार्रवाई हुई। किसानों का ऐतिहासिक संघर्ष और सरकार को पीछे हटाना हमेशा इतिहास के पन्नों में दर्ज रहेगा। ये सभी विरोध कार्यवाहियाँ संसद द्वारा पारित चार श्रम संहिताओं के कार्यान्वयन को रोकने में सफल रहीं, जबकि राष्ट्रपति ने सितंबर 2020 में ही उन पर हस्ताक्षर कर दिए थे।

संघर्ष के दूसरे चरण के रूप में 30 जनवरी 2023 को आयोजित राष्ट्रीय अधिवेशन की घोषणा के अनुसार, विनाशकारी कॉरपोरेट परस्त जनविरोधी नीतियों के कारण संकट में फंसे देश और आम जनता को बचाने के लिए वैकल्पिक नीति के रूप में मजदूर वर्ग की 17 सूत्री मांगों को केन्द्र सरकार के समक्ष रखा गया है। इन मांगों को लेकर 2023 में देशव्यापी राज्य स्तरीय महापड़ाव के दो चरण भी आयोजित किए गए तथा आम चुनाव-2024 से पहले सत्तारूढ़ दल से इन मांगों को अपने चुनावी घोषणापत्र में शामिल करने की “गारंटी” मांगी गई थी । लेकिन अपने तीसरे कार्यकाल में, वे कॉर्पोरेट दबाव में, चार श्रम संहिताओं को लागू करने के लिए बेताब हैं, जिसका उद्देश्य राष्ट्र के बुनियादी उत्पादक वर्ग यानी श्रमिकों के बुनियादी, लोकतांत्रिक और संवैधानिक अधिकारों पर बड़े पैमाने पर अंकुश लगाना है। मौजूदा श्रम कानूनों में कमियों के बावजूद भी कार्यस्थल, मजदूरी, सामाजिक सुरक्षा, स्वास्थ्य, संरक्षण और कल्याण आदि से संबंधित श्रमिकों के अधिकारों के संदर्भ में जो भी कवरेज उपलब्ध है, जो मजदूर वर्ग के लंबे संघर्षों के माध्यम से हासिल किया गया था, उसे 4 श्रम संहिताओं के माध्यम से छीनने की साजिश की जा रही है, जिसे मजदूर वर्ग स्वीकार नहीं करेगा, क्योंकि अगर इसे लागू होने दिया गया, तो यह मजदूर वर्ग को कॉरपोरेट्स का गुलाम बनाने की साजिशों के आगे आत्मसमर्पण करने के बराबर होगा।

अतः जीवन, आजीविका और अधिकारों की रक्षा के लिए 9 जूलाई 2025 को संयुक्त किसान मोर्चा समर्थित मजदूर वर्ग की इस ऐतिहासिक देशव्यापी आम हड़ताल को सफल करना मजदूर वर्ग का ऐतिहासिक दायित्व बन गया है।
आज की सभा को एटक के आई डी प्रसाद, अबु नसर,प्राण सिंह, सीटू के के एन सिंह,आर के गोरांई,आर एन सिंह,एक्टू के देवदीप सिंह दिवाकर,जे एन सिंह, एआईयूटीयूसी के सुभाष प्रमाणिक, बोकारो कर्मचारी पंचायत के आर के वर्मा ने भी संबोधित किया।